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Friday, August 3, 2018

सर्दी जुकाम के घरेलू उपाय और नुस्खे इन हिन्दी (HOME REMEDIES AND IDEAS OF COUGH AND COLD IN HINDI)

सर्दी जुकाम होने पर हमारी दिनचर्या ही बदल जाती है,सर्दी जुकाम बदलते मौसम मे ज्यादा परेशान करते है,इस मौसम मे कभी गर्मी तो कभी ठंड लगती है,कभी ज्यादा पसीने भी आने लगते है जिसके कारण हम ठंडा पानी  पी लेते है तो कभी पंखा या ए सी ऑन कर लेते है,बार बार ठंडी और गर्मी मे आने-जाने से हमे जुकाम हो जाता है।
कभी कभी एलर्जी के कारण भी जुकाम हो जाता है,बहुत लोगो को धूल और धुवा(Smoke And Dust) से भी एलर्जी (Allergy) होती है,बहुतों को तो सॉफ्ट ट्योज(Soft Toys)से भी एलर्जी होती है,वो भी सर्दी जुकाम का एक कारण है,जहा तक हो सके हमे धूल और धुवा से बचना चाहिए,हो सके तो मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकले।
जुकाम होने पर कोई भी काम करने का मन नहीं करता है और सुस्ती आ जाती है। कभी कभी सर्दी जुकाम इतनी बढ़ जाती है तब लगता है कि दवा भी काम नहीं कर रही है तो उस समय आप कुछ घरेलू उपाय से जुकाम को काबू मे कर सकते है। जुकाम होने पर पीड़ित व्यक्ति को ज़्यादा पानी पीना चाहिए, फल ज़रूर खाना चाहिए और पूरा आराम करना चाहिए।
जुकाम होने के बहुत से कारण है इसमे रायनोवायरस इसका सबसे बड़ा कारण है,सामान्य जुकाम का कोई इलाज़ नहीं है,यह घरेलू उपायो द्वारा ठीक किया जा सकता है,जुकाम ज्यादा होने पर ठीक होने मे एक सप्ताह भी लग जाता है।एक सप्ताह से ज्यादा अगर जुकाम रह जाए तो डॉक्टर से भी सलाह लेनी चाहिए।

सर्दी, जुकाम को  ठीक करने के घरेलू उपाय और देसी इलाज (Cough And Cold Ke Liye   Gharelu Upay Aur Desi Illaj In Hindi)      

१) हल्दी और इलायची का पानी (Water Of Turmeric And Elaichi)

एक कप पानी मे २(दो) इलायची और आधी चम्मच हल्दी डालेंगे,इसे खूब उबाल कर आधा पानी कर लेंगे फिर शहद मिलाकर पीने से कैसी भी सर्दी, जुकाम हो आराम मिलता है। जुकाम के कारण पाचन तंत्र बिगड़ जाता है,जिससे हमे भूख भी कम लगती है,उसमे भी इससे आराम मिलता है।

२) छुहारे और देसी घी से सर्दी का इलाज (Chuhare And Pure Ghee Se Sardi Ka Treatment)

२ छुहारे का काटकर पीस लेंगे,इसे हम मिक्सी (Mixi) मे आराम से पीस सकते है,इसके लिए एक चम्मच मे २ से ४ बूंद (Drop) घी लेंगे और उसे हल्का गरम करेंगे,फिर उसमे पिसे हुए छुहारे मिलाएंगे और रोज़ रात को सोते समय लेने से सर्दी, जुकाम मे बहुत आराम मिलता है।

३) चौसठि पीपल से सर्दी का इलाज (Chausathi Peepal se sardi ka illaj)

इसके लिए हम एक पीपल लेंगे और उसे आधे ग्लास दूध मे उबाल लेंगे,और रात को सोते समय बढ़ते हुए क्रम मे पाँच दिन लेने से सर्दी, जुकाम मे बहुत आराम मिलता है। बढ़ते हुआ क्रम का मतलब आज एक, दूसरे दिन दो, तीसरे दिन तीन, फिर चार और पाँच। पाँच दिन से ज्यादा इसे नहीं लेना चाहिए, हो सके तो पीपल को भी चबा कर खा ले और फिर दूध पी ले।

4)हल्दी और दूध (Turmeric And Milk)

हल्दी जो मसालो के लिए काम आती है,उसमे एंटी वायरल और एंटी बेक्टेरियल होता है,यह सर्दी जुकाम मे बहुत काम आती है,अगर हम गरम दूध मे हल्दी मिलाकर रोज़ पिये तो यह बहुत हद तक सर्दी जुकाम को हमारे पास भी नहीं आने देती। यह बड़ो के साथ साथ बच्चो के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

५) अदरख और तुलसी (Ginger And Basil Leaves)

तुलसी मे एंटीओक्सीडेंट होता है,तुलसी और अदरख सर्दी जुकाम के लिए बहुत कारगर है,एक कप गरम पानी मे तुलसी की कुछ पतियाँ और एक टुकडा अदरख डाल कर उबाल ले जब आधा पानी रह जाए तब इसे चाय की तरह धीरे धीरे पी ले इससे सर्दी जुकाम मे बहुत आराम मिलेगा। इसे बड़े और बच्चे सभी ले सकते है। कभी कभी ज्यादा जुकाम होने से सर दर्द और बुखार का भी सामना करना पड़ता है, अदरख तुलसी और शहद की चाय पीने से इसमे आराम मिलता है।

६) नींबू और सेधा नमक (Lemon And Salt)

गरम पानी मे नींबू और नमक मिलाकर पीने से सर्दी मे बहुत आराम मिलता है और गला भी सिकता है।

७)मुलेठी और काली मिर्च (Black Paper And mulethi)

मुलेठी बहुत आसानी से बाज़ार मे मिल जाती है,आप १०० ग्राम मुलेठी और ५० ग्राम काली मिर्च ले ले और उसे पीस ले पीस कर इसका पाउडर तैयार कर ले,जब यह पाउडर तैयार हो जाए तो १  चम्मच शहद मे १/२ चम्मच पाउडर मिलाकर रोज़ सुबह शाम लेने से सर्दी जुकाम को ठीक करता है।
इन घरेलू इलाज़ को अपनाकर हम बिना दवाई के बहुत आसानी से घर बैठे सर्दी जुकाम को ठीक कर सकते है। बदलते मौसम मे बच्चे और बड़े सभी बहुत तेजी से बीमार पड़ते है,इस मौसम मे हवा मे बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेज़ी से फैलते है जिसके कारण नाक से पानी , छिक, सिरदर्द, और नाक भी जाम हो जाता है,जिस कारण साँस लेने भी परेशानी होती है,बहुत से लोगो को एलर्जी के कारण भी जुकाम हो जाता है।सर्दी जुकाम बहुत छोटा सा नाम है,लेकिन अगर किसी को भी हो जाय तो आदमी परेशान हो जाता है,इसके लिए कुछ घरेलू नुस्खे है जिसके उपयोग मे लाने से आराम मिलता ही है।

सर्दी जुकाम ठीक करने के घरेलू नुस्खे (Home Remedies For cough And Cold In Hindi)-

१) सबसे पहले तो पानी खुब पीना चाहिए,क्योकि पेट की गर्मी के कारण ही सर्दी जुकाम होता है,हमे  ठंडा पानी नहीं बल्कि हल्का गुनगुना पानी ही पीना चाहिए।
२) नाक मे हो सके तो देशी घी या गाय का घी की दो-दो बूंद जरूर रोज़ रात को सोते समय डाले,यह इतना सटीक इलाज है,की इसके लगातार उपयोग मे रखने से साइनस तक की बीमारी जड़ से ठीक हो जाती है।
३) अमरूद को भी अगर हम भूनकर खाये तो जुकाम मे बहुत आराम मिलता है,अगर इसे तीन-चार दिन लगातार खाया जाय तो पुराना से पुराना जुकाम भी ठीक हो जाता है।
४) १ ग्लास पानी मे १ पान का पत्ता,१/२चाय की चम्मच अजवाइन,थोड़ी सी हल्दी,२ लौंग,२  इलायची, ५ पत्ते तुलसी डालकर काढ़ा पीने से जुकाम मे बहुत आराम मिलता है।
५) किसी को सूखा कफ हो गया हो और वह जम गया हो तो उसे निकालने के लिए २ ग्लास पानी २ चम्मच पीसी हुई आलसी मिलकर उबाल ले,एक तिहाई(१/३) पानी रह जाने पर खूब मसल कर छान ले,अब इसमे दो चम्मच शहद या मिस्री मिलाकर हर घंटे पीने से बहुत आराम होता है।
६) शहद और अदरक का रस मिलाकर लेने से गले के खराश मे आराम मिलता है बच्चो को भी यह दे सकते है।
७) जायफल और दालचीनी को बराबर मात्रा मे पीस ले,दिन मे दो बार गरम पानी मे मिलाकर पीने से जुकाम मे बहुत आराम मिलेगा।
८) सर्दी खाँसी मे ड्राइ फ्रूट खाने से बहुत राहत मिलती है।
९)  सर्दी जुकाम मे रात को सोते समय सरसों के तेल को नाक और कान मे डालने से बहुत आराम मिलता है, सरसों के तेल से तलवों के मशाज करने से भी बहुत आराम मिलता है।
१०)  लहसून का सूप पीने से भी आराम मिलता है।
११)   थोड़ा सा नमक, दो से तीन लौंग (Clove) अदरख (Ginger)सभी को मिलकर पेस्ट बना ले,दिन मे दो बार इसे खाने से जुकाम मे राहत मिलेगी।
१२)  जुकाम होने पर दूध की चाय के जगह पर तुलसी,अदरक, की चाय पीने से आराम मिलता है।
१३) नीलगिरी का तेल या टी ट्री का तेल या पुदीना की पत्तिया डालकर भाप लेने से बहुत आराम मिलेगा।
१४) सर्दी जुकाम मे किसमिस का पानी पीने से आराम मिलता है,इसके लिए किसमिस के कुछ दाने लेकर पीस लेंगे,इस पीसी हुई किसमिस को पानी मे घोलकर थोड़ी चीनी डाल कर उबाल लेंगे फिर ठंडा होने के लिए छोड़ देंगे,रोज़ रात को सोते समय इसको पीने से सर्दी जुकाम मे बहुत आराम मिलता है।


१५) थोड़ी सी हिंग,गुड़ थोड़ा सा,४ से ५ काली मिर्च को पीस ले। इसमे गुड़ मिलाकर छोटी छोटी गोली बना ले,रोज़ सुबह शाम इन गोलियो का सेवन करे।
१६) हल्दी का धुवा लेने से भी सर्दी जुकाम मे आराम मिलता है।हल्दी को जलाकर धुवा लेने से राहत मिलता है।
इन घरेलू नुस्खो और उपायो को अपने जीवन मे लाकर सर्दी जुकाम मे काफी राहत मिलती है।इन उपायों के साथ साथ हमे योगा प्राणायाम भी ज़रूर करना चाहिए, लगातार योग करने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता(immunity) बढ़ती है और मन भी स्थिर रहता है। हमे सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहिए इसके लिए हमे अपने दिन की शुरुआत योगा के साथ करनी चाहिए अब आप ये सोच रहे है की इसके लिए कौन से योगा किए जाए तो हमे — कपालभाती प्राणायाम,शवासन,अनुलोम-विलोम प्राणायाम करना चाहिए।
सर्दी जुकाम होने पर हमे बाहर वॉक के लिए ज़रूर जाना चाहिए न की घर मे बैठे रहना चाहिए,बाहर की प्रकृतिक हवा से शरीर और आत्मा दोनों प्रसन्न रहते है और कहा भी जाता है की स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ आत्मा का निवास होता है।

कायम चूर्ण के उपयोग एवं फायदे (BENEFITS AND USES OF KAYAM CHURNA IN HINDI)

कायम चूर्ण एक आयुर्वेदिक दवा है जो कब्ज के लिए प्रयोग में आत है। इसमें रेचक गुण हैं इसलिए इसका उपयोग आप कभी कबार कर सकते है जो की सुरक्षित है, पर आप इसे नियमित रूप से उपयोग करते हैं तो यह आपके आंतों को कमजोर कर सकता है। इसलिए इसे कभी कभी इस्तेमाल करे। चलिये जाने कायम चूर्ण के लाभों और उपयोग के बारें में जिससे हम जान पाएंगे की इसे हम कब कब उपयोग करे।
कायम चूर्ण में बहुत से ओषधीय मिले होते है जैसे की सेनाय के पत्ते, मुलेथी, नीशोथ, काली नमक, हरिताकी, स्वजिक्षक, अजवाइन इत्यादि । कायम चूर्ण की मुख्य क्रिया अपने प्रमुख घटक सेंना के पत्तों पर आधारित है, जो आंत्र लिनाओं को उत्तेजित करती है और उत्तेजक रेचक प्रभाव में परिणाम देती है। कायम चूर्ण में रेचक गुण होते है साथ ही इसमे ५० प्रतिशत सनाय की पती होती है जो की गर्मी पैदा करने, दस्तावर,पित्त श्राव को बढ़ाने वाल, जिगर टॉनिक, रेचक, करवा, और तीखा है। सनाय पेट में दर्द या ऐंठन का कारण बनता है, इसलिए उनके विरोधी स्पस्मोडिक कार्यों के कारण इस प्रभाव को कम करने के लिए काली नमक, अजवाइन, स्वंजेक्सरा (शुद्धि) और लीकोरिस को जोड़ा जाता है।

लाभ और औषधीय उपयोग (Benefits and Medicinal uses of kayam churna in hindi)

कायम चूर्ण में 50% सेना पत्ते हैं, इसलिए यह एक दस्तावर और उत्तेजक रेचक पाउडर है , जो क्रोनिक कब्ज से शीघ्र राहत प्रदान करता है। कायम चूर्ण आंत्र परत को परेशान करता है और कब्ज के उपचार में मदद करता है। यह पेट में गैस से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद है, एसिडिटि,पेट में दर्द, सिरदर्द और मुंह में छाले ।

खुराक और दिशा-निर्देश (Dosages and guidelines of kayam churna in hindi )

आप 3 से 6 ग्राम (1 से 2 चम्मच) की खुराक में कायम चूर्ण को रात में सोने से पहले गर्म पानी से ले सकते हैं। साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए दिन में 6 ग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए।
कायम चूर्ण गोलियों के रूप में भी उपलब्ध है। ब्रांड नाम कैम टैबलेट है। कायम चूर्ण की गोलियाँ का खुराक कब्ज की गंभीरता के अनुसार 1 से 2 गोलियां है। हल्के कब्ज में, 1 टैबलेट पर्याप्त होना चाहिए।

सावधानी और साइड इफेक्ट्स (Precaution and Side Effects of kayam churna)

  • आप नियमित रूप से कायम चर्ण का उपयोग नहीं करना चाहिए यह लचकदार आदत विकसित हो सकती है, जिससे कब्ज को खराब हो सकता है या पुराने हड्डी कब्ज में परिणाम हो सकता है।
  • पेट दर्द या ऐंठन में इसका प्रयोग न करे
  • दस्त
  • शरीर में पानी की कमी
  • बच्चों में कायम चूर्ण
  • कायम चुर्ण को 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह बच्चों के लिए असुरक्षित है।
  • गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान कायम चूर्ण के उपयोग से बचे ।
  • कायम चूर्ण गर्भाशय के संकुचन को प्रोत्साहित कर सकती है और गर्भावस्था में खून या उसकी गर्म शक्ति सामग्री के कारण खोल सकता है। इसलिए, गर्भ में कायम चूर्ण का इस्तमाल नहीं करना चाहिए।

कायम चूर्ण निर्भरता पैदा कर सकता है। कई लोगों ने कई दिनों तक कायम चूर्ण का उपयोग करने के बाद कब्ज और रेचक निर्भरता की पुनरावृत्ति की शिकायत की है। हम सलाह देते हैं कि कायम चूर्ण का नियमित उपयोग न करें। समसामयिक उपयोग उपयोगी हो सकता है, लेकिन आपको आहार संशोधनों को करना चाहिए। फाइबर सामग्री में समृद्ध आहार लें और अपने नियमित आहार में 2 से 3 सर्विंग्स और सब्जियों की 3 से 4 सर्विंग्स शामिल करें।और बिना अपने डॉक्टर कि सलाह के कायम चूर्ण न ले।

गर्भघारण करने का तरीका एवं कुछ जरूरी टिप्स इन हिन्दी (HOW TO GET PREGNANT AND SOME IMPORTANT TIPS IN HINDI)

आज शादी और कल से सवालों का सिलसिला शुरू ! तो बेटा खुशख़बरी कब दोगे? दो से तीन कब होगे? परिवार कब शुरू करोगे? ये सवाल सालों से नए जोड़ो से पूछे जाते है और कई बार लोग इन सवालों से मुक्त होने के लिए बच्चा प्लान भी कर लेते है पर क्या ये इतना आसान है?

आज समय बदल चुका है, दोनों लड़का और लड़की अब समझदार हो रहे है और जल्दबाज़ी में परिवार शुरू नही करना चाहते। शादी से पहले ही मिलकर इन बातों पे अपनी समझ बना लेते है.। आज के समय में ज्यादातर दोनों ही वर्किंग होते है और बच्चे पैदा करने से पहले ही हर पहलू पर सोच समझकर कर निर्णय लेते है।
इन सारी चीजों को देखते हुए कई बार कुछ जोड़े काफी समय भी लगा देते है, और वैसे भी आज कल शादियाँ भी २५ या २८ के बाद ही करते है। बच्चे की प्लानिंग में ज्यादा दिन तक रुकने की वजह से आजकल के लड़के और लड़कियों को कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
इन परेशानियों को देखते हुई कई fertility, IVF क्लीनिकस भी खुलते जा रहे है और अज्ञानता के कारण नए जोड़े इन क्लिनिक्स के चक्कर लगाते नज़र आते है। कभी कभी जानकारी के अभाव के चलते पति पत्नी दोनों ही ट्रीटमेंट के नाम पर पैसा खर्चा करते नज़र आते है। हमारे समाज में सेक्स और उससे related topics आज भी छुपा हुआ है और लोग खुल कर इन बातों पे आपस में चर्चा नहीं कर पाते है। यहाँ तक पति और पत्नी तक एक दूसरे से अपनी परेशानियाँ नहीं बता पाते और जानकारी लेने के लिए इंटरनेट का सहारा लेते है।
मैने भी इंटरनेट पे खोज शुरू की और पाया की हज़ारों तरह की जानकारी इंटरनेट पे मिलती है पर कुछ बहुत डिटेल मै है, कुछ अधूरी है और कुछ समझने में काफी मुश्किल। मेरी शादी के बाद मै भी 8 साल तक pregnant होने के लिए डॉक्टर्स के चक्कर लगाती थी, मैने भी हर वो उपाय अपनाया जो मुझे पता चला और बाद में पता चला की मै कई छोटी छोटी ग़लतियाँ कर रही थी जिसकी वजह से मैं pregnant नहीं हो पा रही थी।
मैने जाना की अगर कुछ सामान्य सावधानियां ध्यान में रखी जाएँ तो pregnant होना आसान हो जाता है।

प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Important points to keep in mind before planning your pregnancy in hindi)

  • सिर्फ २० से २५ जोड़े ही पहली बार में pregnant हो पाते है, जी हाँ ये हिन्दी सिनेमा नहीं है की आज शादी और 9 महीने बाद बच्चा।
  • ज्यादातर महिलाएं कोशिश (सही तरीके से) करने पे शादी के २ साल के अंदर प्रेग्नेंट हो जाती है और अगर नहीं होती तो २ साल बाद ही उन्हें फर्टिलिटी क्लिनिक का सहारा लेना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट होने के लिए सही समय पे शारीरिक सम्बन्ध बनना बेहद ज़रूरी है क्योंकि महीने के कुछ दिनों में ही एक महिला गर्भ धारण कर सकती है।
  • वह दिन जो की गर्भ धारण के लिए उपयुक्त होते है उन्हें ovulation period कहते है। इस समय महिला के अंडाशय (ovary) से अंडा निकलता है और पुरुष के शुक्राणु (sperms) से मिलकर निषेचित होता है जिसे pregnancy कहते है।
  • प्रेग्नेंट होने के लिए महिला का स्खलन (orgasm) होना ज़रूरी नहीं है पर शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय दोनों का orgasm होना उनके शादी शुदा रिश्ते के लिया अच्छा होता है।
  • पुरुष के शुक्राणु उनके शरीर से निकलने वाले तरल semen के साथ निकलते है जिससे उन्हें गर्भाशय (uterus) तक तेरने में मदद मिलती है और सही समय पे सम्बन्ध बनाने पे वे महिला के अंडे तक पहुँच जाते है।
  • जब आप अपना परिवार बढ़ाने के बारे में सोचे तो कुछ बातें ध्यान में रखना बहुत ज़रूरी है। प्रेग्नेंट हो कर बच्चा पैदा करना आसान है पर एक स्वस्थ माँ और बच्चे के लिए, आपका और आपके पति का स्वस्थ होना और भी ज़रूरी है।

प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले ध्यान देने वाली बाते (Things to keep in mind before planning your pregnancy in hindi)

#१. डॉक्टर से राय ले (Take your doctor’s advice)

प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर मिले। आपका ये जान लेना बहुत ज़रूरी है की आप शारीरिक तौर पर स्वस्थ हैं या नहीं। डॉक्टर के कहे अनुसार आपको अपनी सारी जांच करानी चाहिए ताकि आपको आपके शरीर में किसी भी इन्फेक्शन या बीमारी का पता चल सके और आप अपने आने वाले बच्चे को उससे बचाने का उपाय कर सके। कुछ बीमारियाँ जैसे thalassemia, HIV, Rubella, यौन जनित रोग (STI) और Hepatitis B etc. कि जांच करा के ही pregnancy प्लान करनी चाहिए।

#२. नशा न करे (Stay away from drugs)

हम सभी जानते है की किसी भी तरह का नशा हमारे लिए नुकसानदायक है पर प्रेग्नंसी से पहले या इसके दौरान नशा आपके लिए और आपके बच्चे की जान के लिए खतरा हो सकता है। किसी भी तरह के नशे से बचे। ध्यान रखें की pregnancy प्लान करने से पहले पुरुषों को भी नशे का सेवन रोक देना चाहिए ताकि उनके शुक्राणुओं की क्वालिटी पे कोई असर न आये।

#३. खान पान पे ध्यान दे (Eat healthy food)

अपने खान पान का विशेष ख्याल रखे.।अच्छा और पोष्टिक खाना आपके शरीर को 9 महीने के लिए तैयार करता है और प्रेग्नंसी के समय ज्यादा वज़न बढने से रोकता है। India में दाल खाने का प्रचलन है जो आपको काफी मात्रा में प्रोटीन देती है और हरी सब्जियां आपके शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाती है। अगर आप दूध दही का सेवन करें तो आपको अच्छी मात्रा में calcium भी मिलता है। pregnancy के 6 महीने पहले से अपने खान पान की आदतों में सुधार लाने से pregnancy के समय आप और आप के बच्चे को सही पोषण मिलता रहेगा.।

#४ . तनाव से दूर रहे (stress free)

अपने परिवार और रिश्ते को stress free बनायें । किसी भी तरह का stress आपके शरीर में हार्मोनल बदलाव करता है जिससे conceive करने में परेशानियाँ आती है। stress से बचने के लिए आप योग का सहारा ले सकते है।

#५. सही समय की जानकारी

conceive करने के लिए सही समय की जानकारी रखे। महिला के शरीर में दो अंडाशय होते हैं जिनमे से हर माह एक अंडा एक तरफ से निकलता है। महिला के मासिक चक्र (period) के शुरू होने के 12वें से 16वें दिन पे एक अंडा निकलता है। अगर महिला का मासिक चक्र नियमित है तो ovulation नियमित समय पर आता है पर अगर मासिक चक्र अनियमित है तो उसका कैलकुलेशन करना मुश्किल होता है।
यदि आपका मासिक चक्र 28 दिन का है और अगर आपका मासिक हर महीने २८वे दिन पे शुरू हो जाता है तो आपका ovulation उसके १२वे से १६वे दिने पे होगा.। इसको सरल तरीके से समझने के लिए हम कह सकते है की यदि आपका मासिक हर महीने की 2 तारीख पे शुरू होता है तो 13 तारीख से 17 या 18 तारीख तक आपका ovulation होने की सम्भावना होती है, इसमें आप एक दो दिन जोड़ भी सकते है क्योंकि मासिक एक दो दिन आगे पीछे हो सकता है पर यदि आपका मासिक 6 दिन या उससे ज्यादा आगे पीछे हो तो आपको सही से ovulation पीरियड का पता नहीं लगा सकती है.।
pregnancy प्लान करने के 4 से 6 माह पहले से अपने मासिक चक्र की नियमितता जानने के लिए हर माह period शुरू होने पे calendar पे चिन्ह लगाना शुरू करना चाहिए जिससे आप को सही समय की जानकारी मिल जाएगी।

Ovulation के लक्षण (Symptoms of ovulation)

  • अगर आपका मासिक चक्र पूरे 28 दिन का होता है तो 12वें और 16वें दिन के लक्षणों को पहचाने। इसी दिन ओवुलेशन प्रक्रिया होने की संभावना ज्‍यादा होती है।
  • Ovulation के समय आपकी योनी से निकलने वाले स्राव में बदलाव आता है। वह पारदर्शी हो जाता है व् ऊँगली और अंगूठे के बीच रख कर खेचेने पे चिपचिपा हो जाता है (अंडे की सफेदी की तरह)
  • मासिक चक्र खत्म होते ही रोज सुबह उठ कर अपने शरीर के तापमान को चेक कर के लिखने से भी ovulation के समय की जानकारी मिल जाती है। ovulation शुरू होते ही शरीर के तापमान में बढ़ोतरी आती है जिससे पता चलता है की ovulation शुरू हो चुका है इस तरीके को बैसल बॉडी टेम्परेचर कहा जाता है।
    ovulation के समय महिला के शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा बढ़ जाती है और स्तनों में भारीपन का एहसास होता है।
  • आजकल बाज़ार में ovulation चेक करने की strips भी आ गई है जिसमे urine की कुछ मात्रा डालने पर रंग बदल जाता है और ovulation का पता चल जाता है।
  • इन लक्षणों को ध्यान में रखने से आप 12 से 24 घंटो पहले ovulation का पता चला सकते है और सही समय पर शारीरिक सम्बन्ध बना कर pregnant हो सकते है साथ ही अगर चाहे तो बर्थ कंट्रोल की तरह भी इस्तेमाल कर सकते है।अगर इस दौरान सेक्‍स न किया जाए तो प्रेग्‍नेंट होने की संभावना कम होती है।

प्रेग्नंसी प्लान करते समय कुछ सावधानियां (Precautions to take while planning for pregnancy)

#१. अंडकोषों के प्रति सावधानियां (Precautions to be taken in terms of testicals)

Pregnancy प्लान करते समय पुरुषों का अपने शरीर का ध्यान रखना भी ज़रूरी है. पुरुषों के testicles (अंडकोष) में sperms का निर्माण होता है और यदि उसके तापमान में बढ़ोतरी होती है तो sperms निष्क्रिय हो सकते है इसी कारण अंडकोष शरीर के बाहर होते है. शरीर के तापमान के साथ वह शरीर के पास या दूर अपने आप हो जाते है. यदि पुरुष किसी गरम जगह काम करते है तो उन्हें सावधान रहना चाहिए और साथ ही मोबाइल फ़ोन को ज्यादा देर तक pant की सामने वाली जेब में नहीं रखना चाहिए क्योंकि उसमे से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरने sperms को नुक्सान पंहुचा सकती है.

#२. बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों के सेवन से बचे (Avoid taking medicines without the doctor’s advice)

Pregnancy प्लान करते समय किसी भी दवा का प्रयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर ले क्योंकि कई दवाएँ हमारे शरीर के होर्मोनेस में बदलाव लाती है जिससे conceive करने मे परेशानी हो सकती है.

#३. सेक्स के समय lubricants का प्रयोग ना करें (Do not use lubricants during sexual intercourse)

बाज़ार में कई तरह के lubricants आते है जो को सेक्स के समय लिंग को कड़ा करने या महिला की योनी में तरलता को बढ़ाने के लिए उपयोग में लायी जाती है पर इनके उपयोग से sperms की quality व मोबिलिटी में कमी आती है इसलिए pregnancy प्लान करते समय इनका उपयोग ना करें.
इन छोटी छोटी सावधानियों को ध्यान में रखने से आपको conceive करने में आसानी हो सकती है पर इन सबके साथ डॉक्टर से मिलना व अपनी जांचे कराना न भूले. अगर आप इन सावधानियों को ध्यान में रखने के बाद भी 2 साल में conceive न कर पाए तो डॉक्टर से मिल कर fertility tests करा सकते है। डॉक्टर पुरुषो का sperm test और महिलाओं के fallopian tubes का test कर के आपके fertility के बारे में आपको डिटेल में बता सकता है और pregnant होने के मेडिकल तरीके बता सकता है.
ध्यान रखे की pregnancy की प्लानिंग दोनों पति और पत्नी का निर्णय होता है इसलिए आपस में बात और विचार करके pregnancy प्लान करें और एक दुसरे का दोस्त बन के ऊपर दिए उपायों को अपनाये. अगर आप तुरंत pregnant नहीं हो पाते है तो एक दुसरे को दोष ना दे कर सही कारणों का पता लगायें जिससे आपके रिश्ते में मिठास बनी रहे.

Thursday, August 2, 2018

कई रोगों में लाभकारी ‌है बेल पत्र, जानें इसके 12 अदभुत फायदे और औषधीय गुण

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही शरीर के लिए ऐसे खाद्य आैर पेय पदार्थों की आवश्यकता बढ़ जाती है, जो शरीर को गर्मी से राहत देते हुए ठंडक प्रदान करें। उनमें से बेल भी एक ऐसा फल है, जो पेट के लिए सबसे अच्छा माना गया है। ऊपर से भूरे सुनहरे रंग वाले पके बेल फल का गूदा पीला और खुशबूदार होता है। ठंडी तासीर होने की वजह से इसे शीतल फल भी कहा जाता है।
आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी प्राकृतिक औषधि माना गया है। यह एकमात्र ऐसा फल है जिसकी जड़, छाल, पत्ते, फूल, कच्चे फल और पके फल सभी उपयोगी होते हैं। इसके औषधीय गुणों को देखते हुए इसे अमृतफल भी कहा जाता है।
गर्मियों में नारियल, तरबूज आदि मौसमी फलों की मांग तो रहती ही है, बेल की मांग भी बढ़ जाती है। इसका गूदा हलका कसैलापन लिए मीठा होता है। इसलिए आमतौर पर लोग इसका शर्बत ज्यादा सेवन करते हैं। इसका कच्चा फल पाच्यग्राही और पका फल ज्वर नष्ट करने, जुकाम और श्वास रोग मिटाने तथा मूत्र में शर्करा कम करने वाला होता है।
इस अकेले फल में हजार तरह के गुण छिपे हैं, जो कई रोगों के लिए लाभप्रद हैं। मगर किसी भी घरेलू इलाज को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श कर लेना उचित होता है, ताकि इसका कोई साइड इफेक्ट न हो। आइये जानें बेल खाने के कुछ बेहतरीन फायदे।
  • बेल न्यूट्रिशनल वैल्यू से भरपूर होता है। इसमें प्रोटीन, फाॅस्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम, फैट, फाइबर, विटामिन-सी, बी पाया जाता है। आयुर्वेद में इसके रस को खाली पेट पीने की सलाह दी गई है। यह ज्यादा फायदेमंद होता है। दिन भर बेल का शरबत पीने से कोई फायदा नहीं।
  • दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करने के साथ पेट के रोगों में भी बेल को रामबाण माना गया है। यह एसिडिटी दूर करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। अल्सर और कब्ज के साथ पेचिश की समस्या में यह फायदेमंद है। पेट संबंधी समस्या के लिए इसके मुरब्बे का सेवन करें। बेल का मुरब्बा शरीर की शक्ति बढ़ाने के साथ सभी उदर विकारों से छुटकारा भी दिलाता है।
  • कब्ज से पेट व सीने में जलन रहती हो, तो पचास ग्राम बेल के गूदे में, 25 ग्राम पिसी हुई मिश्री और ढाई सौ ग्राम जल मिलाकर शर्बत बना लें। रोजाना इसका सेवन करने से कब्ज की समस्या से मुक्ति मिलती है।
  • बेल का शर्बत पीने से तपते शरीर की गर्मी दूर होती है और लू से बचाव होता है।
  • गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर पैर के तलवे पर लगाने से आराम मिलता है। लू लगने पर इसके रस को मिश्री के साथ पीना भी सही रहता है। दस्त हो रहा हो, तो इसके कच्चे फल के गूदे का चूर्ण बनाकर काले तिल के चूर्ण के साथ खाएं।
  • पके बेल के गूदे में चिपचिपापन होता है, इसलिए यह डायरिया रोग में काफी लाभप्रद है। यह फल पाचक होने के साथ-साथ बलवर्धक भी है।
  • अजीर्ण में बेल की पत्तियों के दस ग्राम रस में, काली मिर्च पाउडर और सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से आराम मिलता है।
  • अकसर गर्मियों में पाचन तंत्र में खराबी के कारण आंव आने लगती है। ऐसे में प्रतिदिन अधकच्चे बेलफल का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। पके फल का शर्बत का सेवन भी कर सकते हैं।
  • बच्चों के पेट में कीड़े हों, तो बेल के पत्तों का अर्क निकालकर पिलाना चाहिए।
  • बेल के पके फल को शहद व मिश्री के साथ चाटने से खून साफ होता है।
  • कच्चे बेल के टुकड़े को काटकर घर में जलाने से घर कीटाणुरहित हो जाता है।
  • बेल के गूदे में पर्याप्त मात्रा में बीज पाए जाते हैं, जिन्हें निकालकर गूदे को सुखाने के बाद चूर्ण बनाया जा सकता है। इस चूर्ण का सेवन पेट के अनेक रोगों में फायदेमंद होता है। गांवों में लोग बेल के गूदे की टिकिया बनाकर रखते हैं। इस मौसम में यदि आप पके बेल और कच्चे बेल दोनों के गूदे का चूर्ण बनाकर स्टोर कर लें, तो बेहतर होगा।

पपीता खाएं, सेहत बनाएं – पपीता खाने के ये लाजवाब फायदे नहीं जानते होंगे आप!

पपीते को ‘द फ्रूट ऑफ द एंजल’ यूं ही नहीं माना गया है। पूरे साल मिलने वाले इस फल में मौजूद विटामिन ए, बी, डी, प्रोटीन, कैल्शियम, लौह जैसे पोषक तत्व होते हैं। इन्हीं गुणों के कारण इसे स्वास्थ्य के लिए सबसे लाभदायक फलों में से एक माना गया है। हवाइयन और मैक्सिकन पपीते दुनिया भर में काफी प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा भारतीय पपीते भी अत्यंत स्वादिष्ट होते हैं। अलग-अलग किस्मों के अनुसार इनके स्वाद में थोड़ी बहुत भिन्नता भी होती है। कहते हैं अगर नियमित रूप से पपीता खाया जाए, तो पेट संबंधी तकलीफें नहीं होती। यही नहीं पपीते के पत्‍ते और बीज का भी इस्‍तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। मच्छर के काटने से खुजलाहट हो, तो उस जगह पर पपीते के बीज को रगडें, आराम मिलेगा।

सेहत का सच्चा साथी है पपीता…

विटामिन ए और सी से भरपूर होने के कारण पपीता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है। इसमें मौजदू बीटा-कैरोटीन आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है। इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है, जो शरीर की हड्डियां मजबूत करता है और जोड़ों के दर्द में फायदा पहुंचाता है। पपीता खाने से कैंसर का खतरा कम रहता है। इसमें मौजूद फाइबर दिल एवं डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा माना गया है, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है। डेंगू, पीलिया और अनियमित मासिक धर्म के लिए भी यह फायदेमंद माना गया है। पपीते में कम कैलोरी और अधिक मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जो वजन कम करने में मदद करते हैं। कच्चे पपीते में पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है। इस एंजाइम का उपयोग मांस को पकाने में किया जाता है। पाचनतंत्र में गड़बड़ी, कमजोर आंतें, भूख न लगने आदि की समस्या हो, तो पपीता खाना आपके लिए अच्छा रहेगा क्योंकि इसमें मौजूद पपेन एंजाइम पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं। इससे कब्ज की समस्या भी दूर होती है। अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं, तो पपीते का रस आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

प्रेग्नेंसी में क्यों न खाएं पपीता?

क्‍या प्रेग्नेंसी में पपीता खाना खतरनाक है? इस पर कई रिसर्च आ चुके हैं। कई डॉक्‍टरों का मानना है कि गर्भावस्‍था के दौरान पका हुआ पपीता खाना सेफ है। इसको खाने से पाचन तंत्र भी अच्‍छे से कार्य करता है। ब्रिटिश जरनल ऑफ न्‍यूट्रिशन (British Journal of Nutrition) के अनुसार कच्‍चा पपीता खाना गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि पपीते के लिसलिसे पदार्थ में पेप्‍सिन पाया जाता है, जो कि गर्भाशय में संकुचन पैदा करता है, जिससे गर्भपात की आशंका रहती है। इसमें मौजूद लेटेक्स से भी कई महिलाओं को एलर्जी होती है। कुछ लोगों का मानना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान पपीता खाने से मितली और सुबह की सुस्ती में आराम मिलता है, लेकिन सिर्फ पका पपीता। कच्चा या अधपका पपीता प्रेग्नेंसी के दौरान वर्जित माना गया है। ऐसे में इसको खाने से पहले किसी डॉक्‍टर की सलाह अवश्य लें। पपीते को हमेशा सामान्य तापमान पर ही रखें। फ्रिज में रखने से पहले ब्राउन पेपर में इसे लपेट दें, ताकि यह फ्रेश रहे। अगर लड़कियां अपने बालों को मजबूत और चमकदार बनाना चाहती हैं, तो पपीते के इस मास्क का इस्तेमाल कर सकती हैंः

पपीते का हेयर मास्क बनाने की विधि…

  • पका पपीता 1 कप
  • पका केला 1 कप
  • शीरा 1 बड़ा चम्मच
  • नारियल तेल 1 बड़ा चम्मच
  • दही 1 कप
हेयर मास्क तैयार करने के लिए सभी को एक साथ मिक्सी में पीस लें। इस पेस्ट को बालों में आधे घंटे के लिए लगाएं। मास्क को लगाने के बाद बालों को प्लास्टिक कैप से अच्छी तरह से ढंक दें। इसके बाद इसे धोकर कंडीशनर लगाएं। आपके बाल चमकने लगेंगे।

पपीते से खिल-खिल जाए त्वचा..

तपती गर्मी हो या मॉनसून का महीना, पपीते से हर मौसम में आप अपनी त्वचा को मुलायम रख सकती हैं। यह आपकी त्वचा की टोनिंग करने से साथ उसे नम भी रखता है और त्वचा पर चमक भी लाता है। एंटीऑक्सिडेंट युक्त होने के कारण यह एजिंग की समस्या को रोकने में भी फायदेमंद है। अगर नियमित पके पपीते का पेस्ट चेहरे पर लगाएं, तो एजिंग की समस्या भी नहीं रहती। इसमें मौजूद कुछ खास प्रकार के एंजाइम्स पिंपल्स, डार्क पैचेज आदि को दूर करते हैं। यह त्वचा संक्रमण में भी कारगर है। अगर आप कील-मुंहासों से परेशान हैं, तो कच्चे पपीते के गूदे को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं, राहत मिलेगी।

पपीते को आप फटी एड़ियों पर भी लगा सकती हैं। पैरों की त्वचा को निखारना हो, तो आप पके पपीते के छिलके को पीस कर इसका पेस्ट लगा सकती हैं। यदि आपकी त्वचा ड्राई और खुरदुरी है, तो पपीते के साथ शहद मिक्स करके लगाएं। कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें ब्लीचिंग एजेंट भी पाया जाता है, जो त्वचा के रंग को निखारता है। विटामिन-ए, पपेन जैसे तत्वों के होने के कारण पपीता मृत त्वचा को हटाने का भी काम करता है। अगर आपकी त्वचा ज्यादा शुष्क और संवेदनशील हो, तो पपीते का यूज चेहरे पर न करें, क्योंकि यह एसिडिक भी होता है। अगर त्वचा में कसाव लाना चाहती हैं, तो पपीते के गूदे में शहद, चावल का आटा मिलाकर मैश करें और इस पेस्ट को चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं। इस उपाय को सप्ताह में तीन दिन करें। कच्चा पपीता, शहद, स्पा नमक और ऑलिव ऑयल को मिक्स कर आप इसे स्क्रब के तौर पर भी यूज कर सकती हैं। हो सकता है कि आप में से कुछ लोग ऐसे हों, जो पपीता खाना पसंद न करते हों, लेकिन पपीते के इन पौष्टिक गुणों और फायदों को जानने के बाद निश्चित रूप से आप इसे खाने को लालायित हो उठेंगे !!

छोटी सी अजवाइन के हैं बड़े-बड़े गुण – 10 Amazing Health Benefits & Uses of Ajwain (Carom Seeds)

किचन के प्रमुख मसालों में अजवाइन भी एक है। इसका स्वाद तीखा होता है। यह गरम व पित्तवर्धक होती है। स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ यह आपके हाजमे को भी ठीक रखती है। सब्जियों में तड़का लगाने, परांठे और अचार में स्वाद लाने के लिए इसका प्रयोग खूब किया जाता है। कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, सोडियम व पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अजवाइन भले ही देखने में छोटी हो, मगर आयुर्वेद में इसके कई औषधीय गुण बताए गए हैं। तभी तो दादी-नानी के नुस्खों में भी अजवाइन हमेशा से सर्वोपरि रही है। तो आइये जानें, अजवाइन के कुछ खास औषधीय गुणों के बारे में…
  • पेट संबंधी समस्या रहती हो, तो आप इसे घर में पीसकर पाउडर के रूप में रख सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आपने कुछ ज्यादा या ऑयली चीजें खा ली हैं, तो अजवाइन के दानों को काले नमक या चीनी के साथ धीरे-धीरे चबाएं।
  • पेट में किसी कारण से दर्द हो, तो गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच अजवाइन दो या तीन चुटकी नमक के साथ ले सकते हैं।
  • कॉमन कोल्ड हो या माइग्रेन से सिर में दर्द हो, तो अजवायन को पोटली में बांधकर बार-बार सूंघें।
  • अजवाइन को गुड़ में मिलाकर सेवन करने से पित्त से छुटकारा मिलता है। प्रसूति स्त्रियों को अजवाइन व गुड़ मिलाकर देने से भूख बढ़ती है।
  • आधा चम्मच अजवाइन में दो काली मिर्च और एक चुटकी खाने वाला सोडा मिलाकर भोजन के बाद पानी के साथ लेने से वायु विकार दूर होता है।

  • आधा चम्मच शहद में 5-6 बूंद अजवाइन का तेल मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटें। साथ ही अजवाइन का चूर्ण नमक मिले गुनगुने जल में घोल कर उससे गरारे करें। गले की सूजन में लाभ होगा।
  • सूखी खांसी से परेशान हों, तो अजवाइन को चबाने के बाद गर्म पानी पिएं। तेजपत्ते के साथ भी इसे सोने से पहले ले सकते हैं।
  • दांतों में दर्द हो, तो अजवाइन को पानी में डालकर कुछ देर उबालें। इस पानी से दिन में दो या तीन बार गार्गल (गरारा) करें।
  • अजवाइन का बफारा देने से बच्चों को सर्दी और जुकाम से छुटकारा मिलता है।
  • देशी खांड में अजवाइन के तेल की 5-6 बूंदें डालकर खाने से वमन (उल्टी), अजीर्ण (अपच) और थकान में लाभ होता है।

टीबी में खानपान

टीबी से डरें नहीं, लड़ें : बचाव के लिए अपनायें ये आसान तरीके!
बदलते खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से आजकल लोगों में ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) यानी टीबी (जोकि यक्ष्मा, तपेदिक या क्षय रोग के रूप में भी जाना जाता है) काफी कॉमन रोग हो गया है। पौष्टिकता की कमी, लंबे समय तक जंक फूड के इस्तेमाल, मीजल्स (खसरा) या निमोनिया (फेफड़े में सूजन) के बिगड़ने और एचआईवी पॉजिटिव होने से टीबी इन्फेक्शन के मामले पहले से कहीं ज्यादा सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह सोचना कि टीबी सिर्फ गरीबों की बीमारी है, गलत होगा। अब तो वर्ल्ड हेल्थ ऑॅर्गनाइजेशन ने भी टीबी को ग्लोबल इमरजेंसी घोषित कर दिया है।
टीबी एक जीवाणुजन्य संक्रमण रोग है, जो माइक्रो-बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से फैलता है। लोग इसकी चपेट में आते हैं, जिसमें से 87 मिलियन मामले किसी दूसरे मरीज से प्राप्त संक्रमण के कारण उपजी टीबी के होते हैं। हर वर्ष लगभग 4,00,000 भारतीय लापरवाही या अनियमित इलाज के कारण टीबी से मरते हैं।

क्या हैं लक्षण?

अकसर टीबी का जिक्र होते ही कमजोरी, तेज खांसी और बुखार जैसे लक्षण लोगों के दिमाग में आते हैं। मान लिया जाता है कि मरीज के फेफड़ों में ही इन्फेक्शन होगा। मगर टीबी सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि टीबी का इन्फेक्शन शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। पेट, किडनी, रीढ़ की हड्डी, या ब्रेन में टीबी होना आजकल बहुत आम हो गया है।

फेफड़ों की टीबी के मुख्य लक्षण हैं:

  • तीन सप्ताह या उससे लंबे समय तक लगातार तेज खांसी व बुखार आना।
  • वजन में लगातार कमी या थकान महसूस होना।
  • खांसी के साथ बलगम का आना।
  • बुखार आना व ठंड लगना।
  • रात में पसीना आना।

किसे है सबसे ज्यादा खतरा?

वैसे तो किसी भी व्यक्ति को टीबी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। यदि आपका इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक शक्ति) कमजोर है, तो इस स्थिति में आपको टीबी होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे लोग जो उन लोगों के साथ रहते हैं, जो पहले से ही टीबी से संक्रमित हैं, को भी टीबी हो जाती है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट पर गौर करें, तो टीबी का एनुअल (सालाना) इन्फेक्शन रेट लगभग तीन प्रतिशत है और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे होते हैं। क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, इसलिए बच्चों को टीबी से इन्फेक्टेड लोगों से दूर रखना चाहिए।

कब जांच करवाएं?

टीबी का इलाज पहले की अपेक्षा अब काफी आसान हो गया है, लेकिन इसके बावजूद भी टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसका एकमात्र कारण है, लोगों की लापरवाही और जागरूकता की कमी। लंबे समय तक शरीर के किसी भी अंग में दर्द, कमजोरी, बुखार, खांसी जैसे लक्षण दिखें, तो टीबी की जांच जरूर कराएं। जो दवाइयां बताई जाएं, उसे निश्चित समय तक जरूर लेते रहें। उन्हें बीच में न छोड़ें। साथ ही साथ साफ-सफाई और खानपान पर विशेष ध्यान दें और प्रदूषण आदि से बचें।

कैसे करें टीबी से बचाव?

हर बच्चे को जन्म के कुछ दिनों बाद बीसीजी वैक्सीन लगवानी चाहिए। हालांकि श्वसन तंत्र के टीबी को यह 100 प्रतिशत कंट्रोल नहीं कर पाती है, लेकिन टीबी मेनिनजाइटिस (जिसे दिमागी बुखार भी कहते हैं) या दूसरे अंगों के टीबी इन्फेक्शन से ज़रूर बचाती है। अत: बच्चों को बीसीजी की वैक्सीन जरूर लगवाएं। टीबी के प्रति आपकी जागरूकता ही इस रोग को थामने का सबसे सरल उपाय है। आजकल तो सरकारी अस्पतालों में भी टीबी के मुफ्त इलाज की सुविधाएं दी जा रही हैं।